रोज़ की आरती समय-सारणी, विशेष दिनों का समय और अच्छे दर्शन के लिए सुझाव।
नीचे दिया गया समय सामान्य दिनों का है। एकादशी, पूर्णिमा, जन्माष्टमी और फाल्गुन मेले में दर्शन का समय बढ़ जाता है। जाने से पहले स्थानीय स्तर पर समय ज़रूर पूछ लें।
दिन की पहली और सबसे शुभ आरती। इसी समय मंदिर के पट खुलते हैं।
बाबा श्याम का नए वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार होता है। भक्त चुनरी और फूल चढ़ाते हैं।
दोपहर का भोग लगता है। भोग के समय दर्शन थोड़ी देर रुक सकते हैं, फिर दोबारा शुरू हो जाते हैं।
दीप और धूप के साथ शाम की आरती।
दिन की आख़िरी आरती। इसके बाद मंदिर रात के लिए बंद हो जाता है।
मंगला आरती के लिए सुबह 5:00 बजे तक पहुँचने पर कतार छोटी मिलती है और दर्शन आराम से होते हैं।
पारंपरिक या सादे कपड़े पहनें। जूते-चप्पल मंदिर के प्रवेश द्वार पर उतारने होते हैं।
गर्भगृह में मोबाइल और कैमरा ले जाना मना है। पास के लॉकर का इस्तेमाल करें।
सामान्य दिनों में मंदिर सुबह लगभग 5:30 बजे मंगला आरती के साथ खुलता है।
मंदिर रात लगभग 9:00 बजे शयन आरती के बाद बंद होता है। मौसम और त्योहार के अनुसार समय बदल सकता है।
रोज़ पाँच आरती होती हैं: मंगला (5:30), श्रृंगार (8:00), भोग (12:30), संध्या (6:30) और शयन (9:00)।
नहीं, सामान्य दर्शन निःशुल्क है।